meri kahani
कुछ लफ़्ज़
उसके इश्क का कुछ ऐसा अंजाम हुआ मैं हिंदुओं में हो गई वह मुसलमानों में बदनाम हुआ
मैं मंदिरों में रोया करती थी वह मस्जिदों में रोया करता था
मैं मंदिरों में रोया करती थी वह मस्जिदों में रोया करता था
मैं पंडित जी की बेटी थी वह जाकिर साहब का बेटा था
मैं खड़ी रहती थी चौराहे पर वह भी छत पर चढ़ा करता था
तो पूज आती थी मजारों को वह मंदिर में नमाज पढ़ा करता था

क्या पता था जिंदगी ऐसे रंग दिखाएगी
एक महामारी कोरोना के रूप में सबको औकात दिखाएगी
भीड़ भरे बाजारों में भी मानव तलाशा जायेगा
जाति धर्म रूपया पैसा आतंक सुरक्षा रक्षा और दबदबा सब एक तरफ हो जायेगा
By - Sister and Brother
क्या पता था जिंदगी ऐसे रंग दिखाएगी
एक महामारी कोरोना के रूप में सबको औकात दिखाएगी
भीड़ भरे बाजारों में भी मानव तलाशा जायेगा
जाति धर्म रूपया पैसा आतंक सुरक्षा रक्षा और दबदबा सब एक तरफ हो जायेगा
By - Sister and Brother
Awsome
ReplyDeleteThankk YOU
Deletegreat bro.
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