meri kahani
कुछ लफ़्ज़ उसके इश्क का कुछ ऐसा अंजाम हुआ मैं हिंदुओं में हो गई वह मुसलमानों में बदनाम हुआ मैं मंदिरों में रोया करती थी वह मस्जिदों में रोया करता था मैं मंदिरों में रोया करती थी वह मस्जिदों में रोया करता था मैं पंडित जी की बेटी थी वह जाकिर साहब का बेटा था मैं खड़ी रहती थी चौराहे पर वह भी छत पर चढ़ा करता था तो पूज आती थी मजारों को वह मंदिर में नमाज पढ़ा करता था क्या पता था जिंदगी ऐसे रंग दिखाएगी एक महामारी कोरोना के रूप में सबको औकात दिखाएगी भीड़ भरे बाजारों में भी मानव तलाशा जायेगा जाति धर्म रूपया पैसा आतंक सुरक्षा रक्षा और दबदबा सब एक त...